यदि मानव सच्चाई तथा अहिंसा के मार्ग पर चलता है तो वह भय
रहित होता है जिससे उसमे
राष्ट्रभावना त्याग आदि का घर कर जाते है तब वह कठिन
कार्य भी शीघ्रकर दुसरो का मार्ग दर्शन
करता है मानव खाली हाथ आता है तथा मरने पर बाँस तथा रस्सी
का का सहारा लेकर वापिस चला
जाता है सच्चे मानव मे स्वयं का आत्मबल इतना होता है
कि वह बिना किसी भय के ताड/खजूर आदि
के लम्बे से लम्बे पेडो कि चोटी पर बिना किसी
सहारे चढ जाता है क्या ऐसा कोई धनवान जिसने
सच्चाई का रास्ता छोडकर हिंसक ढंगो से
बहुत धन अर्जित किया है ऐसा कर सकता है ? कदाचित नही
! इसी प्रकार सच्चा मानव सूखी रोटी को भी पचा लेता है पर धनवान दुध -मलाई भी खाकर
इन्हे
पचाने हेतु अपने पेट की मालिश करता है सच्चे मानव कि मौत जीवन में एक बार आती है तथा वह
राष्टीय
कष्टो को झेलता हुआ हंसते-2 उसका स्वागत करता
है पर धनवान मौत के भय से हर वक्त
भयभीत रहता है तथा उसको उसके धन कि चिन्ता उसे
उसके धन के साथ खीच ले जाती है यदि मौत
के बाद संसार में मानव की कोई वस्तु बची रहती है तो वह है उसका आर्दश,सच्चाई,त्याग,कार्य
आदि
न कि धन तथा सुख जो उसने इकठ्ठा किया तथा भोगा
प्रेषक
रतन लाल गुर्जर
प्रदोषन नगर,
तहसील व पोस्ट पीपलू
टोंक राजस्थान 304801
मोबाईल 08559941915

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